Monday, March 9, 2020

व्हाट्सएप्प के वैकल्पिक अप्प्स। best WhatsApp alternative apps.


हाल के कुछ दिनों से व्हाट्सएप की लोकप्रियता कम हो रही है। इसका कारण है यूज़र का डेटा लीक या हैक होना। और अब लोग व्हाट्सएप के दूसरे वैकल्पिक ऐप्प की ओर देख रहे है। तो चलिए आज आपको बताते है व्हाट्सएप्प के बाद सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले लोकप्रिय अप्प्स। इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप के बहुत सारे हैं, लेकिन व्हाट्सएप का कुल मार्केट शेयर अन्य सभी एप्लिकेशन के संयुक्त बाजार शेयर से अधिक है। यहाँ व्हाट्सएप के कुछ लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप विकल्प दिए गए हैं:-
1. Telegram :- टेलीग्राम का उपयोग दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। और इसे व्हाट्सएप्प के मुकाबले बहुत ज्यादा सिक्योर और सुरक्षित बताया गया है। और के टेलीग्राम व्हाट्सएप के बाद सबसे ज्यादा यूज़र्स है इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप में से।
2. Hike :- हाईक मेसेजिंग भारत के अंदर उपयोग किया जाने वाला एक बहुत लोकप्रिय इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है। और इस अप्प में भारत के यूजर के लिए कुछ मुख्य फीचर भी दिए गए है। तो अगर आप भारत के अंदर रहते हैं, और व्हाट्सएप के वैकल्पिक ऐप को ढूंढ रहे हैं, तो आप हाइक मैसेजिंग को यूज कर सकते हैं।
3. facebook messenger :- जैसा कि आप जानते हैं सोशल मीडिया एप्स में से फेसबुक को बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है। फेसबुक का यूजर बेस बहुत बड़ा है, इसलिए फेसबुक के साथ आने वाला फेसबुक मैसेंजर इंस्टेंट मैसेजिंग एप के रूप में बहुत ज्यादा पॉपुलर है।
4. Snapchat :-  एक समय में स्नैपचैट बहुत ज्यादा पॉपुलर था कुछ वर्गों के लिए। परंतु बीच में धीरे-धीरे यह इतना ज्यादा पसंद नहीं किया जाने लगा। और अब बाद में फिर से स्नैपचैट धीरे धीरे यूजर को भा रहा है, और इसके यूजर भी बढ़ते जा रहे हैं। स्नैपचैट के अंदर तरह-तरह के फिल्टर और इमोजी मिलते हैं, जो यूजर को बहुत लुभाते हैं। तो अगर आप व्हाट्सएप के जगह पर कोई और ऐप यूज करना चाहते हैं तो एक बार आप स्नैपचैट को भी देख सकते हैं।
5. viber :- वाइबर का इंटरफ़ेस, व्हाट्सएप से बहुत मिलता-जुलता है। तो अगर आप व्हाट्सएप्प से वाइबर में जाते है, तो आपको ज्यादा कुछ अलग नही लगेगा। और अगर आपके ज्यादा दोस्त वाइबर पर है तो आप बिना किसी के हिचक से इसे व्हाट्सएप्प के जगह पर उपयोग कर सकते है।
6. WeChat :- वीचैट चीन के अंदर बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है, परंतु चीन के बाहर इसका उपयोग बहुत कम ही होता है। लेकिन फिर भी वीचैट आपके लिए व्हाट्सएप्प के वैकल्पिक के रूप में एक काफी अच्छा अप्प हो सकता है।
7. Line messaging :- लाइन मेसेजिंग का भी हाल कुछ वीचैट के जैसा ही है। और इसका इंटरफ़ेस कुछ वाइबर से मिलता-जुलता है। तो आप इसे भी व्हाट्सएप वैकल्पिक इंस्टेंट मैसेजिंग एप के रूप में उपयोग कर सकते है।
8. imo :- एक समय में आईएमओ (इमो) और टैंगो को उपयोग काफी किया जाता था, जब तक व्हाट्सएप्प और फेसबुक मैसेंजर में वीडियो कालिंग का विकल्प नही आया था। लेकिन आज भी आप आईएमओ (इमो) और टैंगो को का उपयोग इंस्टेंट मैसेजिंग के लिए कर सकते है।
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क्यूआर कोड और बारकोड क्या होता है? QR code or bar code kya hota hai? iska kya upyog hai?


QR code और barcode दोनो ही एक तरह के कोड है जिसमे मशीनों के द्वारा पढ़े जाने योग्य डेटा को संग्रहित किया जाता है।
जहां क्यूआर कोड एक ओपन सोर्स सिस्टम है जिसे कोई भी यूज़ कर सकता है। यहां QR code का मतलब है  quick response code.  एक क्यूआर कोड के अंदर 7089 अंक या 4296 अक्षर जमा किये जा सकते है। जबकि बारकोड में सिर्फ 12 अंक ही जमा किए जा सकते।
क्यूआर कोड का उपयोग आपने कई जगह पर देखा होगा। जैसे पेमेंट रिसीव करने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग करके पेमेंट लिंक बनाया जाता है।  कई सारे खुदरा बेचे जाने वाले वस्तुओं  के पैकेट पर आपको क्यूआर कोड देखने को मिलता है जिसे स्कैन करके आप उसके अंदर छिपे जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं।
  क्यूआर कोड को आप अपने दैनिक जीवन में भी उपयोग में ला सकते हैं।  जैसे अगर आपको आपके किसी वेबसाइट का यूआरएल बार-बार किसी को बताना पड़ता है, तो आप इसे एक्यूआर कोर्ट में डालकर रख सकते हैं। जिसके बाद अगर कोई उस क्यूआर कोड को स्कैन करेगा तो, वह सीधे आपके वेबसाइट तक पहुंच जाएगा।  इसके अलावा वाईफाई पासवर्ड या ऐसे कई और चीजों का भी qr-code बनाया जा सकता है।
  वहीं अगर हम बात करें बारकोड की तो,  बारकोड ज्यादातर बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने वस्तुओं में इसे प्रिंट करती है।  आज अगर आप कोई भी वस्तु खरीदते हैं चाहे वह तेल, साबुन, बिस्किट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक या कोई और भी वस्तु हो तो, आपको उस पर बारकोड देखने को मिलता है। तो यह बारकोड इसलिए लगाया जाता है ताकि उस वस्तु की गिनती, देखरेख और बिक्री में आसानी लाई जा सके।
   छोटे-मोटे दुकानों पर तो किसी वस्तु की गिनती व देखरेख में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। परंतु अगर हम बात करते हैं बड़े-बड़े वेयरहाउस या मॉल की तो वहां इन वस्तुओं को बहुत ज्यादा मात्रा में रखा जाता है जिसके लिए बारकोड कोड बहुत उपयोगी होता है।  अगर किसी वस्तु पर बारकोड ना लगाया जाए तो बार-बार उसे गिन कर रखना होगा और कितने बीके है और कितने बचे है इसका हिसाब रखना भी मुश्किल हो जाएगा।  बारकोड लगाने से इसका हिसाब रखना बहुत आसान हो जाता है। जब भी कोई वस्तु बेची जाती है, तब उसे इस बार कोड के जरिए स्कैन किया जाता है, और इससे पता चल जाता है, कि वह वस्तु कितनी बेची जा चुकी है, और कितनी बची है।

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बैंक पैसे कैसे कमाते हैं? Bank paise kaise kamate hai?


आपने भी कई बार सोचा होगा की बैंक भला पैसे कैसे कमाते हैं! जो भी पैसे हम बैंक में जमा करते हैं उसके लिए हमें ब्याज भी देते हैं, और इतने सारी फैसिलिटी भी प्रदान करते हैं, तो यह कमाते कैसे हैं। तो चलिए जानते आज बैंक पैसे कैसे कमाते हैं।

           किसी भी बैंक के कई अलग-अलग कमाई के स्रोत हैं। जिसमे से पहला और मुख्य कमाई स्रोत ऋण है। जैसा की आप जानते है, अगर कोई ग्राहक बैंक से ऋण लेता है, तो वहां उसे 10% से लेकर 15% तक ब्याज देना पड़ता है। वहीं अगर कोई व्यक्ति अपना पैसा बैंक में जमा रखता है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा 8% तक ब्याज दिया जाता है। अगर यह पैसा बचत खाता में हो, तो ब्याज और भी कम हो जाता है। यहां ब्याज 3 से लेकर 4% तक ही होता है। और इस तरह से बैंक 4% से लेकर 8% तक ब्याज कमाता है। इसके अलावा बैंकिंग प्रणाली के अन्य कई कमाई के स्रोत निम्न है:-
• क्रेडिट कार्ड जारी करना और रखरखाव शुल्क :-  आपने देखा हो तो कई बार आपको बैंक की तरफ से क्रेडिट कार्ड के लिए कॉल आता होगा जहां वे आपसे क्रेडिट कार्ड लेने के लिए कहते हैं क्योंकि क्रेडिट कार्ड जारी करने पर उन्हें आपको शुल्क देना होता है और क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने पर आपको प्रति वर्ष कुछ पैसे देने होते हैं और इस तरह क्रेडिट कार्ड से बैंको की कमाई होती है।
• डेबिट कार्ड जारी करने और रखरखाव शुल्क :-  डेबिट कार्ड या  ATM card  तो आपके पास भी होगा।  अगर आपको बैंक से पैसे निकालने हैं तो डेबिट कार्ड का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं डेबिट कार्ड के लिए भी आपको कितना पैसा देना पड़ता है? कई सारे बैंक तो आपको शुरू में फ्री में डेबिट कार्ड दे देते हैं, परंतु कई सारे बैंक आपको जब पहली बार डेबिट कार्ड देते हैं, तो वहां आपसे कुछ चार्ज लिया जाता है। इसके अलावा जब आप डेबिट कार्ड का उपयोग करते हैं तो  आपके बैंक अकाउंट से प्रतिवर्ष डेबिट कार्ड चार्ज लिया जाता है।  इस तरह बैंक के द्वारा जितने भी डेबिट कार्ड दिए गए होते हैं उन सभी डेबिट कार्ड धारकों से सालाना पैसे वसूल किए जाते हैं।

• क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड नकद निकासी शुल्क :- अगर आपके पास एक क्रेडिट कार्ड है, और आप उससे एटीएम से जाकर पैसे निकालते हैं, तो आपसे वहां कुछ चार्ज लिया जाता है। वहीं अगर आपने कोई डेबिट कार्ड ले रखा है, तो कुछ 4 से 6 बार आपको एटीएम से फ्री में कॅश निकालने दिया जाता है, परंतु अगर आप इससे ज्यादा बार पैसे निकालते हैं, तो आपको हर बार बैंक को कुछ एक्स्ट्रा चार्ज देना होता है। और इस तरह जितनी बार आप 1 महीने में अधिक एटीएम कार्ड को यूज करेंगे उतना ज्यादा आपको अधिक पैसा देना होगा।

• चेकबुक जारी करने और चेक बाउंस शुल्क :-  बैंक से अगर कोई चेक बुक लेना चाहता है, तो चेक बुक जारी करने के लिए बैंक उनसे कुछ चार्ज वसूल करती है। इसके अलावा अगर कोई चेक बाउंस हो जाता है, जैसे अगर अकाउंट में पैसे नहीं हो और आपने किसी को चेक दे दिया है, तो ऐसे में चेक बाउंस हो जाता है। और चेक बाउंस होने पर उस खाताधारक के एकाउंट से दंड के रूप में कुछ पैसे काट लिए जाते हैं।

• एसएमएस अलर्ट शुल्क :-  जब भी आपके बैंक अकाउंट से पैसे निकाले जाते हैं या जमा किए जाते हैं या किसी और तरह का कोई गतिविधि होता है, तो इसके लिए बैंक के तरफ से आपको एसएमएस (message) आता है। पर क्या आप जानते हैं सालाना आपको s.m.s. के लिए भी चार्ज देना होता है। हर साल में एक बार बैंक आपके अकाउंट से s.m.s. चार्ज काटती है।

• मासिक औसत बैलेंस प्रभार शुल्क :-  हर तरह के क्षेत्र के लिए, बैंकों के द्वारा, बैंक एकाउंट में, एक कमसे कम उपलब्ध होने की निर्धारित राशि तय की गई है। अगर कोई व्यक्ति महीने के अंत तक उस तय की गई राशि से कम राशि अपने अकाउंट में रखता है, तो इसके लिए उनसे कुछ चार्ज उनके अकाउंट से काट लिया जाता है। इस तरह के चार्ज से ज्यादातर कमाई ग्रामीण क्षेत्रों में होती है।

• इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन शुल्क :- अगर आप अपने बैंक की ऑनलाइन सर्विसेज का उपयोग करते हैं, तो वहां आपको कुछ ट्रांजैक्शन फ्री दिए जाते हैं। परंतु अगर आप ज्यादा बार पैसों का लेनदेन इंटरनेट बैंकिंग के जरिए करते हैं, तो वहां भी आपको कुछ शुल्क देना होता है।

• बीमा :- कई सारे बैंक अलग-अलग तरह के बीमा योजना भी चलाते हैं। जिसमें वे जीवन बीमा, वाहन बीमा इत्यादि बेचते हैं, और इनसे भी उनको कमाई होती है।

• लॉकर सुविधा :-  कई सारे बैंकों के द्वारा आपको लॉकर की  सुविधा भी दी जाती है। जिसमें आप अपने कीमती वस्तुओं को बैंक में जमा करके रख सकते हैं। और इसके लिए आपको सालाना एक निश्चित रकम देनी होती है।

• बांड और म्यूच्यूअल फण्ड :- जैसा कि आप जानते होंगे बैंकों के अलग-अलग कई सारे मुचल फंड भी होते हैं, जहां से उनको कमाई होती है। इसके अलावा अगर बैंक के पास ज्यादा पैसे जमा हो जाते हैं, और वह ज्यादा लोन नहीं दे पाते हैं, तो बचे हुए पैसों को वे सरकारी बांड या म्यूच्यूअल फंड में ही इन्वेस्ट करते हैं। जहां से उन्हें अच्छी खासी रिटर्न मिल जाती है।

यह थे कुछ मुख्य बैंकों के कमाई का जरिया। इसके अलावा भी कई सारे तरीके हैं जहां से बैंक पैसे कमाते हैं। यहां आपके दिमाग में यह सवाल आ सकता है कि अगर छोटे-छोटे चार्जर्स जैसे s.m.s. चार्ज इत्यादि से बैंक को भला कितना ज्यादा फायदा होता होगा! तो आप थोड़ा मैथ करेंगे तो आप देख पाएंगे कि आप से लिया गया एक छोटा सा रकम अगर लाखों-करोड़ों लोगों से लिया जा रहा है तो वह कितना ज्यादा हो सकता है।
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Saturday, February 15, 2020

क्या ट्रूकॉलर खतरनाक है? truecaller dangerous hai?


कई सारे वीडियो और पोस्ट में ट्रूकॉलर को खतरनाक बताया गया है। कहा जाता है की ट्रूकॉलर उपयोगकर्ता का कांटेक्ट डिटेल्स चुराता है।  मगर ऐसा नहीं है। जैसा कि आप जानते होंगे ट्रूकॉलर कोई सरकारी कंपनी नहीं है, और ना ही कोई टेलीकॉम कंपनियां इन्हें डाटा प्राइड करती है। मगर अगर हमें कोई अनजान नंबर से कॉल आता है तो truecaller हमें बता देता है कि वह किस व्यक्ति का नंबर है। तो truecaller  जो भी हमें रिजल्ट दिखाता वह सब जानकारी हम जैसे यूज़र से ही लेता है।  जब हम ट्रूकॉलर को अपने फोन में इंस्टॉल करते हैं और रजिस्टर करते हैं, तो सबसे पहले ट्रूकॉलर हमें हमसे कांटेक्ट की परमिशन मांगता है। जिसके बाद वह हमारे स्मार्टफोन में उपलब्ध सभी कांटेक्ट को चेक करता है, और देखता है कि कौन सा नंबर किस व्यक्ति के नाम से सेव किया गया है। और इसे अपने सर्वर पर अपलोड करके रखता है, ताकि अगर आपके कांटेक्ट में से किसी भी नंबर से किसी अनजान व्यक्ति को कॉल जाता है, तो आपके डेटा में से उस व्यक्ति को बताता है, कि आपको किस व्यक्ति का कॉल आ रहा है। इस प्रकार ट्रूकॉलर हमसे हमारा डाटा, सिर्फ हमारे इंफॉर्मेशन को बेहतर बनाने और बेहतर रिजल्ट दिखाने के लिए लेता है।
  और ऐसा भी नहीं है कि ट्रूकॉलर ही एक ऐसा एप्लीकेशन है, जो आपकी कांटेक्ट इनफार्मेशन को जमा करता है। इसके अलावा कई सारे पॉपुलर एप्स जैसे गूगल मैप्स, गूगल पे, पेटीएम इत्यादि आपकी कॉन्टैक्ट इनफॉरमेशन का उपयोग करती है।
   जैसे अगर आप व्हाट्सएप चलाना चाहते हैं, तो आपको व्हाट्सएप को अपना कांटेक्ट इनफार्मेशन इसलिए देना होता है, ताकि व्हाट्सएप देख पाए कि आपके कांटेक्ट में से कौन-कौन व्हाट्सएप पर रजिस्टर्ड है, और उन्होंने क्या कुछ अपडेट किया है।  वहीं अगर आप व्हाट्सएप को अपना कांटेक्ट की जानकारी नहीं देते हैं तो व्हाट्सएप आपके फोन में ठीक से काम नहीं कर पाएगा। तो कुछ ऐसा ही होता है truecaller के साथ में।


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किसी तरह के अनचाहे ई-मेल को आने से कैसे रोके? आने वाले ईमेल को अनसब्सक्राइब कैसे करें? Kisi bhi tarah ke anchahe emails Ko aane se kaise roke? How to unsubscribe email?


जब भी हम किसी नई वेबसाइट या ऐप में रजिस्टर करते हैं, तो वहां हमें अपना मोबाइल नंबर या अपना ईमेल आईडी देना होता है। और इस तरह हमारी ईमेल आईडी कई सारे जगहों पर शेयर हो जाती है। इसके बाद हमें तरह-तरह के कई सारे ईमेल आने लगते हैं, और इससे बहोत चिड़चिड़ा महसूस होता है, तो हम उसे रोकने के उपाय ढूंढने लगते है। तो यहां लगभग ईमेल में उसे अनसब्सक्राइब करने का एक विकल्प होता है। जहां अगर आप किसी ईमेल को अगर अनसब्सक्राइब करते है तो, उस तरह के या उस अप्प और वेबसाइट के ईमेल बाद में नही आते है।
वही ईमेल आने से रोकने के कुछ और उपाय भी हैं, जैसे आप उस ईमेल को ब्लॉक या स्पैम रिपोर्ट कर सकते हैं।
  चलिए देखते हैं यह सब हम किसी ईमेल में कैसे कर सकते हैं।
  1. सबसे पहले आप उस ईमेल को खोल दीजिए जिसे आपको बंद करना है।
  2. इसके बाद आपको उस ईमेल के नीचे देखना है। बिल्कुल अंत में आपको ई-मेल को अनसब्सक्राइब करने के लिए ऑप्शन दिया गया होता है। यहां आपको unsubscribe, out-me, click here लिखा हुआ मिल सकता है। आपको उससे लिंक पर क्लिक करना है।


  3. लिंक पर क्लिक करने के बाद कभी-कभी अपने आप ही अनसब्सक्राइब हो जाता है, पर कुछ ईमेल में आपको अनसब्सक्राइब करने का कारण पूछा जाता है। अगर कारण पूछा जाए तो आपको सही कारण चुनकर सबमिट कर देना है जिसके बाद वह ईमेल अनसब्सक्राइब हो जाएगा।


       वही आप ईमेल के ऊपर दाहिने कोने में बने तीन बिंदु पर क्लिक करके उसे ब्लॉक या रिपोर्ट स्पैम भी कर सकते हैं।  जिसके बाद अगर वहां से आपको कोई ईमेल आता भी है तो वह अपने आप ही स्पैम में चला जाएगा।




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Sunday, February 9, 2020

किसी क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड में सीवीवी क्या होता है? Kisi credit card ya debit card me CVV kya hota hai?


आपके पास अगर एक क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड है तो आपने देखा होगा आपको एक 3 अंकों का सीवीवी कोड देखने को मिलता है, तो चलिये जानते हैं, इसका क्या उपयोग है, और यह हमारे कार्ड के ऊपर क्यों दिया गया होता है।
CVV (card verification value) एक 3 या 4 अंको का कार्ड सिक्योरिटी कोड है, जो कार्ड के द्वारा होने वाले अनाधिकृत लेनदेन को रोकने में मदद करता है। यह visa, master और rupay जैसे कार्ड में, कार्ड के पीछे साइड चुम्बकीय क्षेत्र के नीचे 3 अंकों का होता है। जहां CVV visa card में 4 से शुरू होता है और master card में 5 से। वही amex (american express) कार्ड में, कार्ड के सामने और 4 अंको का होता है।
  अगर आप कार्ड को लेकर किसी तरह का लेनदेन करते हैं जैसे ATM से पैसे निकलते है, या कार्ड से कही पेमेंट करते है, तो इसके लिए सीवीवी का उपयोग नहीं होता है। परंतु जब आप अपने कार्ड के द्वारा ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, जैसे आप कुछ ऑनलाइन खरीदते समय पेमेंट करते हैं, या किसी को पैसे भेजते हैं अपने कार्ड के द्वारा तो, यहां आपको अपना सीवीवी नंबर डालना होता है।  और कोई भी वेबसाइट जहां आप अपने कार्ड से पेमेंट करते हैं आपके सीवीवी को स्टोर नहीं करता है। जिसके फलस्वरूप आप जितनी बार भी अपने कार्ड से ट्रांजैक्शन करना चाहेंगे आपको उतनी बार अपना सीवीवी नंबर डालना होगा।
  ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि अगर आपके कार्ड का डिटेल कहीं लीक हो जाता है, तो आपका सीवीवी नंबर उन तक नहीं पहुंच पाएगा और कार्ड के द्वारा फ्रॉड नही होगा।
   बहुत सारे कार्ड्स में अक्सर सीवीवी कार्ड के पीछे साइड इस लिए दिया जाता है, ताकि अगर कोई कार्ड का फोटो या वीडियो सामने से ले ले तब भी उनको CVV का पता नहीं चल पाएगा।

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रैम क्या होता है? किसी स्मार्टफोन में कितना रैम होना आवश्यक है? Ram kya hota hai? kisi smartphone mein Kitna Ram jaruri hai?


जैसा कि आप जानते होंगे हमारे स्मार्टफोन या कंप्यूटर सिस्टम में दो तरह की मेमोरी होती है। एक तो रैम मेमोरी होती है, वही दूसरा रोम मेमोरी होती है, जिसे हम internal storage भी कहते है।
तो आप यहां internal storage या ROM memory के बारे में तो जानते होंगे। रोम मेमोरी में हमारे स्मार्टफोन या कंप्यूटर सिस्टम का सारा डाटा दूर होता है जैसे एप्स, वीडियोस,फोटोस इत्यादि।
  परंतु यहां रैम मेमोरी का काम कुछ और होता है। जब हम किसी एप्लीकेशन को खोलते हैं, तो यह एप्लीकेशन जहां खुलता है वह जगह रैम मेमोरी का होता है, जब कोई अप्प या सॉफ्टवेयर किसी स्मार्टफोन में या कंप्यूटर सिस्टम में काम करता है, तो यह रैम के ऊपर ही काम करता है। तो यहां जितना ज्यादा रैम होगा उतना ही ज्यादा अप्प्स एक साथ काम कर पाएंगे। अगर रैम कम होगा तो अप्प्स एक साथ कम अप्प्स काम कर पाएंगे और धीरे-धीरे काम कर पाएंगे। परंतु अगर ज्यादा रैम मिलती है, तो एक साथ ज्यादा अप्प्स और ज्यादा तेजी से काम कर पाएंगे।
  परंतु ऐसा भी नहीं है कि, किसी स्मार्टफोन या कंप्यूटर सिस्टम में रैम ही सब कुछ होता है। किसी भी स्मार्टफोन या कंप्यूटर सिस्टम को काम करने के लिए रैम से ज्यादा एक अच्छे प्रोसेसर की जरूरत होती है। अगर रैम बहुत ज्यादा दे दिया जाए परंतु उसमें एक अच्छा प्रोसेसर नहीं है, तो यहां रैम किसी भी काम का नहीं है।
   पहले के समय में किसी स्मार्टफोन में 512mb तो किसी स्मार्टफोन में 1 से 2gb तक का रैम दिया जाता था। और इतने में सभी एप्लीकेशन अच्छे से काम कर लेते थे। परंतु आज सभी एप्लीकेशन बड़े साइज के हो गए हैं, और यह ज्यादा से ज्यादा रैम का उपयोग करते हैं। इसलिए आज के समय में किसी स्मार्टफोन में कम से कम 4gb या उससे ज्यादा रैम का होना आवश्यक हो गया है।

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खोए हुए कांटेक्ट को वापस कैसे लाएं? गूगल कॉन्टैक्ट्स बैकअप और रिस्टोर कैसे करे? Khoye hue contacts ko wapas kaise laye? Google contacts backup or restore kaise karen?

   अगर किसी एंड्राइड फोन में कांटेक्ट को हमेशा के लिए सुरक्षित करके रखना है, तो इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है, गूगल कांटेक्ट के अंदर उसका बै...