Monday, August 10, 2020

Paid apps और in app purchases में क्या अंतर है? Paid apps aur in-app-purchase mein kya Antar hai?

 जब हम पेड एप्प (paid apps) या in-app-purchase की बात करते है तो हमे समझ आता है की उस अप्प के लिए हमें पैसे देने होंगे। पर क्या आपको पता है की इनके बीच क्या अंतर है और किस तरह के अप्प खरीद पर कब पैसे देने होते है? तो चलिए आगे हम इसे ही जानते है।


    सबसे पहले हम paid app की बात करते है, तो पेड अप्प में किसी अप्प या गेम को इनस्टॉल और उपयोग करने के लिए पहले पैसे देने पड़ते है। मतलब पेड अप्प्स को इनस्टॉल करने से पहले ही आपको पैसे देने होंगे। 


    पर वही अगर हम in app purchase की बात करते है तो यह आपको पेड और फ्री दोनो ही अप्प्स में देखने को मिलेंगे। इन अप्प परचेस का मतलब है, अप्प के अंदर ही खरीददारी। कई सारे अप्प और गेम है जिनको इनस्टॉल करने के बाद उसके अंदर ही कुछ प्रीमियम और पेड सर्विसेज का उपयोग करने के लिए अलग से पैसे देने होते है। जैसे PUBG एक बहुत पॉपुलर गेम है इसे इंस्टाल करने के लिए कोई पैसे नही लगते मतलब यह एक फ्री अप्प है, पर गेम के अंदर कुछ हथियार इत्यादि खरीदने के लिए आपको पैसे देने होते है, तो जब जब आप अप्प के अंदर पैसे देकर कुछ सर्विसेज खरीदते है तो इसे न अप्प परचेस कहते है। 


    कुछ पेड अप्प्स के अंदर भी in-app-purchase का ऑप्शन मिल जाता है। वही बहोत सारे ऐसे अप्प भी है जो बिल्कुल फ्री है, ये नही paid अप्प है और नही in-app-purchase।

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Sunday, August 2, 2020

UPI Auto-pay क्या है? Autopay kya hai?

unified payment interface (UPI) 2.0  के अंदर National payment Corporation of India (NPCI) एक और नया फीचर जोड़ दिया है। AutoPay का। 


NPCI की स्थापना 2008 में की गयी थी जो सभी तरह की पेमेंट का देखरेख और मैनेजमेंट करती है। कुछ साल पहले ही NPCI के द्वारा रुपए कार्ड (Rupay Card) को प्रचलन में लाया गया था। और NPCI ने ही जुलाई 2016 में UPI को लांच किया था। और तब से अब तक UPI के करोडों उपयोगकर्ता है। UPI ऑनलाइन पैसो के लेनदेन के लिए ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, क्रेडिट और डेबिट कार्ड के मुकाबले बहुत आसान है। और अब इसी कक देखते हुए UPI के अंदर autopay के फीचर जोड़ा जा रहा है।
UPI autopay के उपयोग से हर महीने भरे जाने वाले Bill, EMI, SIP, loan, insurance इत्यादि का भुगतान करने के लिए हर महीने पेमेंट करने की आवस्यकता नही होगी। upi उपयोगकर्ता चाहे तो बस एक बार upi uptopay सेटअप करके इससे  निजात पा सकता है, और हर महीने बिना उसके कुछ किये भी उसका पेमेंट उसके बैंक से होता रहेगा। और ऐसा नहीं है कि अगर आपने एक बार autopay सेटअप कर दिया तो आप उसे बदल नहीं सकते, आप जब चाहे उस ऑटोपे को पाऊस या डिलीट कर सकते हैं। इसके लिए आपके यूपीआई एप के अंदर ही ऑटोपे मैंडेट (AutoPay Mandate) का एक ऑप्शन दिया जाएगा।
पर इसमे भी एक लिमिट दी गयी है। अगर आप UPI Autopay सेटअप करते है, और आपका प्रतिमाह भुगतान की राशि ₹2,000 या उससे काम है, तो यह ठीक से काम करेगा और आपमे कुछ किये बिना ही आपका पेमेंट हर महीना होता रहेगा,  परंतु वही अगर autopay के लिए आपका प्रति भुगतान की राशि ₹2,000 से ज्यादा का है, तो आपको पेमेंट करने के लिए upi अप्प में जाकर हर महीने अपना upi पिन डालना होगा तभी पेमेंट हो पायेगा।


UPI Autopay सेटअप करने के लिए पेमेंट करते समय आपको UPI पेमेंट विकल्प में Autopay mandate पर क्लिक करना होगा और फिर UPI अप्प में रिडेरेक्ट होने पर आपको चुनना है की कितने महीने के लिए आप autopay करना चाहते है। महीने सेलेक्ट कर लेने के बाद आपको बस UPI पिन डालकर पेमेंट कर देना है।


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Monday, July 20, 2020

मैसेज में शॉर्ट किये हुए लिंक क्यों भेजे जाते है? SMS me short kiye huye links kyu bheje jate hai? Onelink, bit.ly, tink in messages

अगर आपने ध्यान दिया हो तो जब भी किसी कंपनी के तरफ से कोई मैसेज भेजा जाता है, और उस मैसेज में अगर किसी वेबसाइट का लिंक है, तो वह लिंक उस वेबसाइट के नाम पर ना होकर एक शॉर्टलिंक होता है। तो क्या आप जानते हैं, वह इस तरह के लिंक मैसेज में क्यों भेजते हैं? 





इस तरह के लिंक भेजने के मुख्यतः तीन कारण है जिन कारणों से मैसेज या ई-मेल के अंदर इस तरह के शॉर्टलिंक भेजे जाते हैं।
1. गतिविधि पर नज़र रखना :- अगर आपको इस तरह के लिंक मैसेज या ईमेल में किसी वास्तविक वेबसाइट या कंपनी की ओर से आता है, तो इसका सीधा मकसद होता है कि लोगों को ट्रैक किया जाए कि जितने भी मैसेज या ईमेल भेजे गए हैं उनमें से कितनों के ऊपर क्लिक किया गया है।  किसी भी वेबसाइट या वेब पेज का लिंक  भेजने से पहले अगर उस लिंक को शॉर्ट कर दिया जाए तो उस वेबसाइट का वास्तविक नाम उस लिंक के अंदर नहीं आता, और जिस वेबसाइट पर इस लिंक को शार्ट किया जाता है वहां से उसे ट्रैक भी किया जा सकता है कि उस सेट किए गए लिंक पर कितने लोगों ने क्लिक किया है। जैसे अगर आपको किसी मैसेज में कोई लिंक https://bit.ly/xyz से आता है, तो मतलब इस लिंक को bitly वेबसाइट से शार्ट किया गया है। आप चाहे तो सीधे गूगल पर bit.ly सर्च करके उस वेबसाइट पर जा सकते है। वैसे ही कुछ लिंक onelink पर शार्ट किये जाते है जिसके लिये वेबसाइट है onelink.me या कुछ लिंक tiny के ऊपर भी शार्ट किये हुए हो सकते है।
                  अगर आप भी चाहे तो इन वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट बनाकर किसी भी लिंक को शार्ट करके कहीं भेज सकते हैं, और उसे ट्रैक भी कर सकते हैं।

2. क्योंकि कई बार कुछ वेब एड्रेस और वेब पेज या वेबसाइट के लिंक बहुत लंबे होते हैं, इसलिए उन्हें शार्ट करके छोटे भी बनाए जाते हैं। और इसलिए भी आपको अलग तरह के शार्ट किये हुए लिंक देखने को मिल सकते हैं।

3.  वहीं कुछ लोग लिंक शार्ट करके मैसेज में इसलिए भेजते हैं, क्योंकि वह कुछ अवैध गतिविधि कर रहे होते हैं।और ऐसे वेबसाइट के लिंग होते हैं उस मैसेज में जिसे देखने पर कोई उस पर क्लिक ना करें। इसलिए भी कई बार धोखा करने वाले लिंक को शार्ट करके मैसेज में भेजते हैं।

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Wednesday, May 20, 2020

बिना किसी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर के पीडीएफ फ़ाइल से पासवर्ड कैसे हटाये? Bina kisi additional software ke PDF files se password kaise remove Karen/ kaise hataye?

अक्सर जब हम कोई बैंकिंग स्टेटमेंट्स या कोई और फ़ाइल को पीडीएफ फ़ाइल में प्राप्त करते है, तो यह पासवर्ड प्रोटेक्टेड होता है। ऐसे में अगर आपको यह फ़ाइल किसी के साथ शेयर करना है तो आपको पासवर्ड भी बताना पड़ता है। ऐसे में अगर आपको पासवर्ड नही बताना हो तो आपको इसका पासवर्ड हटाना पड़ेगा। तो चलिये देखते है कैसे हम किसी पासवर्ड प्रोटेक्टेड पीडीएफ फ़ाइल से पासवर्ड को रिमूव कर सकते है।


इसके लिए कई सारे पेड और फ्री सॉफ्टवेयर भी आते है, पर यहाँ हुम् देखेंगें के कैसे हम बिना किसी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर का उपयोग किये ही पासवर्ड को रिमूव कर सकते है। यहाँ हम आपको एक स्मार्टफोन में यह करके बता रहे है, पर आप चाहे तो ठीक ऐसे ही प्रोसेस से डेस्कटॉप पर भी कर सकते है।

इसके लिए सबसे पहले आपको उस पीडीएफ पर क्लिक करके उसे पासवर्ड डालकर खोल लेना है।


इसके बाद आपको ऊपर तीन बिंदु (थ्री डॉट्स) दिखेंगें, जिसपर आपको क्लिक करना है।


क्लिक करने के बाद आपके पास कुछ विकल्प खुलकर आएंगे, जिसमे से आपको प्रिंट (print) पर क्लिक करना है।


प्रिंट पर क्लिक करने के बाद यह फ़ाइल प्रिंट होने के लिए लोड होगा। जिसके बाद आपको वहा सेव (save) का एक विकल्प/आइकॉन दिखेगा, जिसपर आपको क्लिक करना है।


यहाँ सेव पर क्लिक करने बाद यह आपसे सेव करने का लोकेशन बतायेगा, आप इसे वही या किसी और प्लेस पर सेव कर सकते है। इसबार जब आप सेव पर क्लिक करेंगें तो यह पीडीएफ फ़ाइल बिना किसी पासवर्ड प्रोटेक्शन के ही आपके डिवाइस में सेव हो जाएगा।
अब आप जब उस सेव किये हुए पीडीएफ फ़ाइल को खोलेंगे तो आपसे कोई भी पासवर्ड नही पूछा जाएगा। और कुछ इस तरह आप किसी पीडीएफ फ़ाइल से पासवर्ड को हटा सकते है बिना किसी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर का उपयोग किये।

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Thursday, April 16, 2020

डीबीटी बैंक एकाउंट कैसे बदले? DBT (Direct benifit transfer) Account kaise change kare?

इससे पहले हमने आपको DBT के बारे में बताया था। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण या DBT के माध्यम से सरकार किसी व्यक्ति के बैंक एकाउंट में सीधे राशि को भेजती है। 400 से भी ज्यादा तरह के बेनिफिट्स का प्रत्यक्ष राशि ट्रांसफर DBT के जरिये किया जाता है। 



अब अगर ऐसे में किसी व्यक्ति को अपना DBT बिनीफिट्स के लिए एकाउंट बदलना हो, तो कोई एक सहज तरीका नही है जिसके माध्यम से किसी भी बैंक को DBT के लिए बदला जा सकता है।  यहां अलग-अलग बैंकों के लिए DBT एकाउंट बदलने की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। जैसे अगर आप kotak 811 का खाता खोलते है, तो खाता खोलते समय ही आपसे पूछा जाता है, की आपका कोई एकाउंट DBT के लिए चुना हुआ है, या आल इसे DBT के लिए सेलेक्ट करना चाहते है। वहां अगर आप चाहे तो kotak 811 के एकाउंट को डब्त के लिए चुन सकते है। या तो फिर खाता खोल लेने के बाद भी आप kotak 811 अप्प में जाकर DBT बेनिफिट्स के लिए अनुरोध कर सकते है, इसके लिए आपको अप्प में ही विकल्प मिल जाता है। ठीक उसी प्रकार अगर आप DBS का digibank account ऑनलाइन खोलते है तक यहां भी आपको DBT के लिए इस एकाउंट कक चुनने या एकाउंट बदलने का विकल्प मिल जाता है। परंतु अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एकाउंट को आप DBT के लिए सेलेक्ट करना चाहते है, तो इसके लिए आपको सबसे पहले आपका kyc अपडेट करना होगा आधार नंबर के साथ। फिर आपको DBT बेनिफ्ट्स जैसे गैस सब्सिडी के लिए गैस एजेंसी में जाकर आपका बैंक एकाउंट अपडेट करवाना होगा। तब जाकर आपका DBT एकाउंट SBI में चेंज हो पायेगा। तो ऐसे हर बैंक के लिए DBT बदलने के लिए अलग-अलग प्रक्रिया है। आगे चलकर मैं यहां आपको बताता हु, कैसे आप पेटीएम पेमेंट्स बैंक को DBT एकाउंट के लिए सेलेक्ट कर सकते है ऑनलाइन।
       अगर आपको चेक करना है की अभी आपका कौनसा बैंक DBT के लिए चुना हुआ है तो इसके लिए आपको https://resident.uidai.gov.in/bank-mapper पर जाना होगा। यहां आपको आपका आधार नंबर और कैप्चा डालना है, फिर generate otp पर क्लिक करना है। क्लिक करते ही आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा उसे आपको सबमिट करना है, जिसके बाद आप देख पाएंगे कि आपका कौन सा बैंक अकाउंट अभी डीबीटी के लिए सिलेक्ट किया हुआ है।



       Paytm payments bank को DBT एकाउंट बनाने के लिए सबसे पहले पेटीएम अप्प में अपने बैंक में लॉगिन करना है।


 
       लॉगिन करने के बाद आप अगर नीचे जाएंगे तो बैंकिंग सर्विसेज में आपको Direct benifit transfer का एक विकल्प दिखेगा जिसपर क्लिक करके आप अपने DBT एकाउंट के लिए  Paytm payments Bank को चुन सकते है।




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Sunday, March 15, 2020

किसी एंड्रॉइड फोन में बीटा मैनेज करने का सबसे आसान तरीका। Best beta manager app for Android.


कई सारे लोग जो किसी एप्लीकेशन के नए फीचर को आने से पहले ही यूज़ करना चाहते हैं, वह उस एप का बीटा वर्जन यूज करते हैं। बीटा वर्जन में किसी भी नए फीचर को पहले दे दिया जाता है टेस्ट करने के लिए  और बाकी सभी को यह नया फीचर बाद में दिया जाता है।
तो  अगर आप भी एंड्राइड में किसी एप का बीटा वर्जन यूज करते हैं, तो यहां आपके लिए एक छोटा सा एप्लीकेशन बहुत उपयोगी हो सकता है, जिसका नाम है Beta maniac.
एंड्रॉइड में बीटा अप्प्स को मैनेज करने के लिए यह बहुत उपयोगी हो सकता है। इस अप्प का उपयोग करके आप अपने फोन में किसी भी ऐप का बीटा एक ही जगह से ज्वाइन कर सकते हैं, या छोड़ सकते हैं। इस ऐप के अंदर ही आपको बता दिया जाएगा कि आपके फोन में मौजूदा एप्स में से कौन-कौन से ऐप्स में बीटा वर्जन उपलब्ध है, और किसे आपने जॉइन कर रखा है।

कैसे डाउनलोड करना है, और कैसे उपयोग करना है, जानने के लिए नीचे वीडियो देखें।👇

डिजीलॉकर में uploaded documents और issued documents में क्या अंतर है? Digilocker mein upload documents aur issued documents kya hai?


Digilocker में दो तरह के डॉक्यूमेंट देखने को मिलते है, एक uploded documents और दूसरा issued documents। तो  लोग यहां कंफ्यूज़ होते है की कोनसा डाक्यूमेंट्स कहाँ उपयोग में लाया जा सकता है, और कोनसा कहाँ मान्य नही होगा।
तो डिजिलॉकर अप्प में अगर कोई  दस्तावेज किसी सरकारी एजेंसी से जारी कराए गए हैं, तो यह सब जगह वैध माने जाएंगे। वही अगर कोई दस्तावेज आपने उस अप्प में खुद से डाला है (upload किया है) तो यह सिर्फ आपके लिए है, और यह हर जगह मान्य नही होगा।
अब जैसे अगर आप कहीं बाहर गए है गाड़ी लेकर और आपने गाड़ी के पेपर व ड्राइविंग लाइसेंस नही लिया है। और अब ऐसे में अगर आपसे गाड़ी के पेपर व ड्राइविंग लाइसेंस पूछे जाते है, तो आप डिजिलॉकर में पड़े दस्तावेज दिखा सककते है। परंतु ये दस्तावेज तभी वैध माने जाएंगे जब ये issued documents में होंगे। अगर आप uploded documents में से ये दस्तावेज दिखाते है तो वैध नही माने जाएंगे, और आपको फाइन भी देना पैड सकता है।
डिजिलॉकर में डाक्यूमेंट्स उपलोड करने का विकल्प इसलिए दिया गया है, ताकि आप अपने किसी और तरह के डॉक्यूमेंट, जो डिजिलॉकर में कहीं से जारी नही कराये जा सकते, को अपलोड करके रख सके। और अगर आपको भविष्य में कभी जरूरत पड़े तो आप यहाँ से निकालकर या प्रिंट लेकर इसका उपयोग कर सके।
और बेहतर वीडियो में समझने के लिए यहां देखे।👇

खोए हुए कांटेक्ट को वापस कैसे लाएं? गूगल कॉन्टैक्ट्स बैकअप और रिस्टोर कैसे करे? Khoye hue contacts ko wapas kaise laye? Google contacts backup or restore kaise karen?

   अगर किसी एंड्राइड फोन में कांटेक्ट को हमेशा के लिए सुरक्षित करके रखना है, तो इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है, गूगल कांटेक्ट के अंदर उसका बै...